Notice Board
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो० सोहन लाल यादव जी ने सूचित किया है कि : बी०ए०, बी०कॉम० एवं बी०एस-सी० भाग-१, २ एवं 3 संस्थागत/भूतपूर्व के छात्र/छात्राएँ अपना ऑनलाइन परीक्षा आवेदन-पत्र दिनांक 15-11-2017 से महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ के वेबसाइट www.mgkvp.ac.in से निकाल कर दिनांक 20-11-2017 से 15-12-2017 तक महाविद्यालय में आवश्यक रूप से निम्नलिखित काउंटर पर जमा कर दे | बी०ए०, बी०कॉम० एवं बी०एस-सी० भाग-१ (संस्थागत) के छात्र अपना रजिस्ट्रेशन नम्बर महाविद्यालय के सूचना पट्ट से देखकर अपना ऑनलाइन परीक्षा आवेदन-पत्र निकाले | बी०ए० भाग-१ (संस्थागत) : सामान्य काउंटर – अशोक कुमार द्विवेदी बी०ए० भाग-२ (संस्थागत) : भूगोल विभाग – श्री जीतेन्द्र कुमार यादव एवं शशि शेखर मिश्र बी०ए० भाग-3 (संस्थागत) : काउंटर नं० 02 – श्री प्रमोद कुमार पाण्डेय बी०कॉम० भाग-1 (संस्थागत) : काउंटर नं० 06 – श्री हरिनाथ यादव बी०कॉम० भाग-2 (संस्थागत) : काउंटर नं० 12 – श्री श्याम मोहन झा बी०कॉम० भाग-3 (संस्थागत) : मनोविज्ञान विभाग – श्री गणेश यादव बी०एस०सी० भाग-1 (संस्थागत) : जंतु प्रयोगशाला – श्री अवनीश सिंह बी०एस०सी० भाग-2 (संस्थागत) : वनस

महाविद्यालय के स्नातकोतर एवं स्नातक तृतीय वर्ष में अध्ययनरत छात्रों को सूचित किया जाता है कि महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के सेवायोजन परामर्श प्रकोष्ठ द्वारा दिनांक 16-11-2017 को पूर्वाह्न 11:30 बजे से एक मार्ग दर्शन सत्र का आयोजन महाविद्यालय के समिति कक्ष में किया गया है | छात्रों से अनुरोध है कि मार्ग दर्शन सत्र में प्रतिभागी बनकर सरकारी एवं निजी क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार के अवसरों के सम्बन्ध में बहुमूल्य जानकारी प्राप्त कर लाभान्वित हो | -------- (डॉ ओम प्रकाश सिंह, संयोजक)

महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी सत्र २०१७-18 एम०ए०/एम०कॉम०/एम०एस-सी०/बी०एड० प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर तथा विधि प्रथम, तृतीय एवं पंचम सेमेस्टर का ऑनलाइन परीक्षा आवेदन पत्र दिनांक १२-10-२०१७ से 02-11-२०१७ तक कार्यालय समा पर जमा होगा | एम०ए०/एम०कॉम०/एम०एस-सी०/बी०एड०/विधि प्रथम सेमेस्टर के छात्र/छात्राएँ अपना रजिस्ट्रेशन नंबर नोटिस बोर्ड से देखकर ऑनलाइन परीक्षा आवेदन-पत्र सम्बंधित काउंटर पर जमा करेंगे |

हरिश्चंद्र स्नातकोतर महाविद्यालय, वाराणसी की सत्र २०१७-१८ की बी०ए० भाग-एक के प्रवेश परीक्षा में सम्मिलित एवं प्रवेश परीक्षा के इच्छुक अभ्यर्थियों को सूचित किया जाता है कि समाजशास्त्र एवं शिक्षाशास्त्र विषयों के सापेक्ष रिक्त सीटों पर विश्वविद्यालय के निर्देशानुसार प्रवेश कार्य दिनांक 10-10-2017 को प्रातः 10:00 बजे से कला संकाय में सम्पादित किया जायेगा | अभ्यर्थियों को वैकल्पिक विषय के रूप में समाजशास्त्र या शिक्षाशास्त्र का अनिवार्य रूप से चयन करना होगा एवं प्रवेश शुल्क तत्काल जमा करना होगा | अभ्यर्थी तदनुसार अपने मूल अंक पत्रों चरित्र प्रमाण-पत्र एवं रैगिंग विरोधी शपथ पत्र के साथ उपस्थित हों|

महाविद्यालय के समस्त मुख्य नियन्ता, उप-मुख्य नियन्ता तथा नियन्ता मण्डल के सदस्यों की एक आवश्यक बैठक दिनांक 05-10-2017 को दिन में 12:00 बजे प्राचार्य कक्ष में आहूत है | आप सभी की उपस्थिति आवश्यक है |

आज दिनांक २१ जून २०१७ योग दिवस के अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापको, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं द्वारा योग किया गया |

बी०एड० सत्र २०१७-१९ में प्रवेश एवं बी०एड० से सम्बंधित किसी भी अन्य जानकारी हेतु बी०एड० विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ० ललिता शुक्ला (मो० नं : 9415626206) व डॉ० अजय कुमार सिंह- एसोसिएट प्रोफेसर, बी०एड० (मो० नं – 9838719980) से संपर्क कर सकते हैं |



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Founder

Our Founder: Bharatendu Harishchandra


Wrap Text around ImageA rarity with vision and a phenomenon with ideal, Bharatendu Harishchandra, the highly distinguished founder and the moving force of this institution, has immortalized himself on account of his yeoman services towards literature, society, culture, language and Nation.

His contribution to evolution and popularization of what preceded present-day Hindi and his enrichment of different branches of Hindi literature are considered so substantialthat Bharatendu Harishchandra is rightly called the Father of Modern Hindi.

Born on Sept. 9, 1850, Bharatendubabu lived a very short life of about 34 years and left for heavenly abode on Jan. 6, 1885.His exceptional literary contribution was inspiring, entertaining, ecstatic, and character-molding and was soaked with national and patriotic feeling. It was as useful to the contemporary Indians as it still is to the present Indian Society.

Bharatendu Harishchandra's realization of the importance of education was so acute that he started a school in 1866 in his house for the poor. This school which Bharatendu has started with five student on its rolls is today's Harish Chandra Postgraduate College having a strength of about 6000 students.